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  1. हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पर दम निकले बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

  2. हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन, दिल के खुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है

  3. इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब', कि लगाये न लगे और बुझाये न बुझे

  4. तेरे वादे पर जिये हम, तो यह जान, झूठ जाना, कि ख़ुशी से मर न जाते, अगर एतबार होता

  5. तुम न आए तो क्या सहर न हुई हाँ मगर चैन से बसर न हुई मेरा नाला सुना ज़माने ने एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई

  6. जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है

  7. इश्क मुझ को नहीं वहशत ही सही मेरी वहशत तेरी शोहरत ही सही

  8. इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ खुदा लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं

  9. उन के देखे से जो आ जाती है चेहरे पर रौनक वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

  10. बे-वजह नहीं रोता इश्क़ में कोई ग़ालिब जिसे खुद से बढ़ कर चाहो वो रूलाता ज़रूर है

  11. लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब” हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है

  12. नादान हो जो कहते हो क्यों जीते हैं “ग़ालिब “ किस्मत मैं है मरने की तमन्ना कोई दिन और

  13. ख्वाहिशों का काफिला भी अजीब ही है ग़ालिब अक्सर वहीँ से गुज़रता है जहाँ रास्ता नहीं होता

  14. रात है ,सनाटा है , वहां कोई न होगा, ग़ालिब चलो उन के दरो -ओ -दीवार चूम के आते हैं

  15. इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया वरना हम भी आदमी थे काम के

  16. हाथों की लकीरो पे मत जा ग़ालिब नसीब उनके भी होते है जिनके हाथ नहीं होते

  17. मेहरबाँ हो के बुला लो मुझे, चाहो जिस वक्त, मैं गया वक्त नहीं हूँ, के फिर आ भी न सकूँ।

  18. कितना खौफ होता है शाम के अंधेरों में, पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते|

  19. इस कदर तोड़ा है मुझे उसकी बेवफाई ने गालिब, अब कोई प्यार से भी देखे तो बिखर जाता हूं मैं|

  20. हम तो फना हो गए उसकी आंखे देखकर गालिब, न जाने वो आइना कैसे देखते होंगे